नवा गुरुजी
नवा गुरुजी
एक गाँव के सरकारी इस्कूल म एक झन नवा गुरुजी विनोद दत्ता आये रिहिस।देखे म बड़ ऊँच पुर अउ कर्री कर्रीआँखि वाला रिहिस।जइसे ही लइका मन ल ओखर आये के पता चलिस ओखरे बारे म पूरा इस्कूल म चर्चा चले ल लग गे।नवा गुरुजी कइसे होही, कइसे पढ़ाही ,सब्बो लइका मन इहि सोचत रहाय।ओमन बस अतके ही जान पाइस की दत्ता गुरुजी ह गणित पढ़ाही।
उहि इस्कूल म सोनू दसवी कक्षा म पढ़त रिहिस।दत्ता गुरुजी सोनू के कक्षा म गिस।ओला देखते साथ सब्बो लइका मन लकर धकर अपन अपन जगा म खड़े होगे।नवा गुरुजी ह लइका मन ल खड़े होवत देखके खुश होगे।
ओहा चारों मुड़ा ल देखिस त एक झन सोनू नाँव के लइका ह बेंच म बइठे रिहिस ,ओला बइठे देख के गुरुजी ह तमतमागे।ओला अब्बड़ सुनाइस तभो ले सोनू ह नइ उठिस।गुरुजी के पारा चढ़ गे ओहा एक ठन छड़ी ल धरिस अउ सोनू ल तड़ातड़ मारे ल धर लिस।पूरा कक्षा म डर के मारे सन्नाटा छा गे अउ सोनू ह सुसक सुसक के रोथे। गुरुजी ल अउ घुस्सा आथे अउ किथे चल उठ ,खड़े हो अउ कुकरा बन।
सोनू रोवत रोवत अपन जगा म ही बइठे रिहिस।गुरुजी ह किथे अरे ढीट ते काबर खड़े नइ होतस ,तोड़ गोड़ टूट गे हे का।
सोनू अउ जोर जोर से रोथे।तहान एक झन लइका ह हिम्मत कर के किथे।गुरुजी सोनू ह खड़े नइ हो सके, वो ननपन ले ही नइ चल सकय।
गुरुजी सोनू के गोड़ ल देखथे, ओला सब्बो बात समझ आ जथे।अपन गलती के भान हो जथे त मुड़ी म हाथ रखके खुद ल अब्बड़ कोसथे अउ पछताथे।
सोनू ल चुप कराथे ओखर आँसू ल पोछते अउ अपन भूल बर माफी तको माँगथे।
सोनू ह किथे ,"गुरुजी एमा आपके कोनो गलती नोहे ,मोला पहिली ले बता देना रिहिस।"
गुरुजी ह ओ दिन नइ लइका मन ल नइ पढ़ा सकिस। घेरी बेरी ओला सोनू के आँसू ह दिखे।अपन गलती के पछतावा हावय।
छुट्टी के बाद गुरुजी ह सोनू के घर चल दिस अउ ओखर दाई बाबू ल सब्बो बात ल बता के माफी माँगिस।ओखर दाई बाबू मन तको किथे गुरुजी मन तो देवता बरोबर होथे, हमर लइका मन के जिनगी ल बनाथे।अइसन छोटे मोटे गलती सब से हो जथे।माफी झन माँगव गुरुजी।हमर लइका मन के जिनगी ह तुँहरे हाथ म हाबे।
दत्ता गुरुजी के आय के खबर ह गाँव म आगी बरोबर फइल गे।
ओखर बाद दत्ता गुरुजी के आदत म बदलाव आगे।ओहा जम्मों लइका मन के मयारू गुरुजी बन गे।दत्ता गुरुजी अपन जिनगी ल ओ लइका मन बर समर्पित कर दिस।
शिक्षक दिवस के दिन जम्मो गाँव वाले मन मिलके दत्ता गुरुजी के सम्मान करिस।
अनिता चन्द्राकर, व्याख्याता गणित
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