छत्तीसगढ़ी वर्णमाला

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अ - अ से अथान अम्मट ,नुनचुर।
आ - आ से आमा हरियर,  पिंयर।
इ - इ से इड़हर अब्बड़ सुहाथे।
ई- ई से ईंटा जोरे म बड़ मजा आथे।
उ - उ से उरिद दार के बरा बनाबो।
ऊ - ऊ से ऊँटवा ल पत्ता खवाबो।
ए - ए से एक्कागाड़ी म घुमय ल जाबो।
ऐ - ऐ से ऐंठी पहिन के सबला देखाबो।
ओ - ओ से ओंगन तेल ल चक्का म लगाबो।
औ - औ से औघड़ बबा ले दूरिहा  रहिबो।
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क - क से करसी के पानी पिबो।
ख - ख से खटिया म बबा संग सुतबो।
ग - ग से गरुआ के सेवा करबो।
घ - घ से घर ल गोबर म लिपबो।
च - च से चंउक सुग्घर पूरथे दाई।
छ - छ से छत्ता म मदुरस भराही।
ज - ज से जँवारा हरियर हरियर।
झ - झ से झँउहा लाहुँ तोर बर।
ट - ट से टठिया म बासी खाबो।
ठ - ठ से ठगुवा से बाँच के रहिबो।
ड - ड से डबरा के पानी देखव।
ढ - ढ से ढँकना म साग ल ढाँपव।
त - त से तरिया म कुदके नहाबो।
थ- थ से थरहा ह देखे बर जाबो।
द - द से दरमी लाली लाली।
ध - ध से धनिया के महकत बारी।
न - न से नरवा हमर चिन्हारी।
प - प से परेवा हमर संगवारी।
फ - फ से फरा चलव बनाबो।
ब - ब से बर म झुलना झुलबो।
भ - भ से भलुआ जंगल म रहिथे।
म - म से मछरी तउरत रहिथे।
य - य से यदुवंशी भाई मन नाचत हे।
र -  र से रमकेलिया काबर लजावत हे।
ल -ल से लइका मन पढ़य बर जाहि।
व - व से वकालत के गियान पाहि।
स - स से सरई जंगल के मान बढ़ाथे।
ह - ह से हरदी ह अब्बड़ ममहाथे।

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