माँ की ममता

 

माँ ममता की मूरत होती ,माँ होती भगवान।
माँ का स्थान अद्वितीय , माँ गुणों की खान।
माँ शब्द में संसार बसा है ,माँ से बढ़कर कौन।
अद्भुत धैर्य वसुधा सा उनमें ,सहती रहती मौन।
माँ धूप में शीतल छाया ,स्नेह भरी पुरवाई माँ।
सर्द भोर में गुनगुनी धूप ,हर रोग की दवाई माँ।
गंगाजल सी पावन होती ,माँ पूजा की थाली।
गोद लगे सुखद बिछौना ,माँ की बात निराली।
माँ नाम समर्पण का ,वात्सल्य की निर्मल धारा।
खुश रहती सबकी खुशी में ,होती सुदृढ़ सहारा।
अमृत रस पिला बच्चों को ,वो आनंद भर देती।
दया प्रेम करुणा का पर्याय ,माँ सबसे प्यारी होती।
छलक पड़े आँखो से आँसू ,माँ की याद आते ही।
मुँह से निकलता माँ माँ , चोंट जरा सा लगते ही।

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