प्रकृति

कलकल नदियाँ, झरनें की झर झर, 
गिरि सुनाते अपना राग।
हरी वादियाँ, जंगल झाड़,
फूलों से आच्छादित बाग।
चंदा तारे हमें सुलाते, 
सूरज आता, कहता जाग।
मिट्टी की महक, चिड़ियों की चहक,
 भौरें, तितली पीते पराग।
प्रकृति हमारी माँ समान, 
करती अपने बच्चों से प्यार।
हम भी इनकी रक्षा करें, 
ताकि ना हो कोई बीमार।




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