Mera kanha
#मेरा कान्हा# बन जाऊं मैं राधारानी, पर मेरा वो श्याम कहां है। बन जाऊं मैं मीरा दीवानी,पर मेरा घनश्याम कहां है । हर भाषा के शब्द अलग है, पर प्रेम की भाषा एक है। नैनों में सजते सपने कई, मन की अभिलाषा एक है। बन जाऊं मैं गोकुल की गोपी, पर मेरा नंदलाल कहां है। मन में उठती कई तरंगे, पर बसी भावना एक है। रंग बिरंगे चेहरे देखे, पर रूप सलोना एक है। बन जाऊं मैं ब्रज की गैया, पर मेरा गोपाल कहां है। हे कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी, तेरे तो कई नाम है। मुझको तू मिल जाए कान्हा, मेरी चाहत बस एक है। बन जाऊं होठों की मुरली, पर मेरा यदुलाल कहां है।