रिस्ता
* रिस्ता *
बड़ सुरता आथे मोला,मोर महतारी के कोरा।
जेमा मढ़ा के मुडी ला,
जम्मो सुख ला पावन ।
नइ भुला सकन , बाबु के कांधा।
जेमा बइठ के हमन,
जम्मो संसार ला देखन।
भाई बहिनी के सुरता,
कभु हंसाथे कभु रोवाथे।
संगी जहुंरिया के मया,
जम्मो पिरा ला भुलाथे।
बड़ मयारू लईका मन,
मिठ मिठ बोली जेकर,
मया के डोरी ला,
अउ कस के बंधाथे।
बड़ अनमोल ए रिस्ता संगी,
कभु झन भूलाहू ।
कभु मीठ त कभु करु,
फेर एखरे ले दुनिया चलथे।
श्रीमती अनिता चंद्राकर
बड़ सुरता आथे मोला,मोर महतारी के कोरा।
जेमा मढ़ा के मुडी ला,
जम्मो सुख ला पावन ।
नइ भुला सकन , बाबु के कांधा।
जेमा बइठ के हमन,
जम्मो संसार ला देखन।
भाई बहिनी के सुरता,
कभु हंसाथे कभु रोवाथे।
संगी जहुंरिया के मया,
जम्मो पिरा ला भुलाथे।
बड़ मयारू लईका मन,
मिठ मिठ बोली जेकर,
मया के डोरी ला,
अउ कस के बंधाथे।
बड़ अनमोल ए रिस्ता संगी,
कभु झन भूलाहू ।
कभु मीठ त कभु करु,
फेर एखरे ले दुनिया चलथे।
श्रीमती अनिता चंद्राकर
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