कुण्डलिया छत्तीसगढ़ी में

 बादर

करिया बादर छाय हे, मन मा जागे आस।
आके बरखा आज तँय, बुझा धरा के प्यास।।
बुझा धरा के प्यास, गिरा दे अतका पानी।
नाचय गावय खेत, पहिन के लुगरा धानी।।
बरसे मूसर धार, भरे टिपटिप ले तरिया।
हाँसत हवय किसान, देख के बादर करिया।।

बादर करिया आय हे, पानी बड़ बरसाय।

हरियर खेती खार हा, सबके मन ला भाय।।

सबके मन ला भाय, लबालब तरिया भरही।
जावत खेत किसान, काम खेती के करही।।
धरती के श्रृंगार ,  दूब के हरियर चादर।
झूमत हावय पेड़, देख के करिया बादर।

आ जा बरसा झूम के, देखत बाट किसान।
खेत खार हा भींजही, तब हरियाही धान।।
तब हरियाही धान, झूमही डारा पाना।
कलकल नरवा धार, मगन हो गाही गाना।।
होही पोठ अनाज, बजाही बादर बाजा।
हवय अगोरा तोर, झूम के बरसा आ जा।।

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