कहानी4 .प्रोत्साहन
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सीमा बहुत ही होनहार लड़की थी।पढ़ाई के अलावा नृत्य और गाने का उसे बहुत शौक था।अपने अच्छे व्यवहार के कारण वह अपने शिक्षकों की बहुत प्रिय छात्रा थी।शाला में वार्षिक उत्सव की तैयारी चल रही थी।सभी बच्चे तैयारी में लगे थे।जब बच्चे नृत्य का अभ्यास करते थे ,सीमा का मन भी नाचने के लिए मचल उठता था।वो अपना हाथ पाँव हिलाने लग जाती।उनके चेहरे के भावों के तो क्या कहने ,पर सारी लड़कियाँ उनका मजाक उड़ाती थी।"चल भाग लंगड़ी कहीं की ,ये तेरे बस का काम नहीं है ।" लड़कियों की ऐसी बातें सुनकर सीमा का मन टूट जाता था।वह अकेले में जाकर फूट फूट कर रोती थी।एक दिन उनकी शिक्षिका की नज़र सीमा पर पड़ी ,वह दूर खड़े होकर नृत्य का अभ्यास करती लड़कियों को देख रही थी।उनके आँखों की नमी को शिक्षिका समझ गई।वह सीमा के क़रीब जाकर उसके सिर पर हाथ फेरी।उन्होंने सीमा से उसकी उदासी का कारण पूछा।सीमा सब कुछ बता दी।शिक्षिका उन बच्चों के पास सीमा को ले जाकर बोली , "सीमा इस वार्षिक उत्सव के सभी नृत्य के लिए गायन करेगी।सीमा की आवाज बहुत ही मधुर है और यह बहुत अच्छा गाना भी गाती है।ये सुनकर सभी बच्चे दंग रह गए।शिक्षिका ने उन लड़कियों को समझाया कि हमें किसी का मजाक उड़ाने के बजाय ,उनका हौसला बढ़ाना चाहिए।शिक्षका की सूझबूझ से सभी को ये बात समझ में आ गई।सीमा को अब अपनी बैसाखी पर गुस्सा नहीं आता था।अपनी शिक्षिका का स्नेह आधार और सतत प्रोत्साहन से वह जीवन में काफी आगे बढ़ी।बड़ी होकर वह एक अच्छी शिक्षिका बनी।जो सकारात्मक ऊर्जा के साथ हमेशा सबको प्रोत्साहित करती और प्यार की सुगंध फैलाती थी।
श्रीमती अनिता चंद्राकर ,व्याख्याता
शा.उ.मा.वि. पहंडोर ( पाटन ),दुर्ग

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