कहानी 1.

भूल का एहसास

किसी गाँव के सरकारी स्कूल में सोनू ,कक्षा आठवी का छात्र था। वह बहुत ही सीधा-साधा और होनहार छात्र था । उसके स्कूल की ख्याति दूर दूर तक फैली थी ,कारण था वहाँ के प्रतिभावान बच्चों की उपलब्धि और स्कूल का अनुशासन। उसके स्कूल में एक बार गणित विषय के एक नए शिक्षक 'दत्ता सर' आये। दिखने में काफी ऊँचे पूरे और आकर्षक व्यक्तित्व के वे धनी थे। पहले ही दिन वे सोनू की कक्षा में गए। उनको देखते ही सभी बच्चे अपनी जगह में खड़े हो गए। ऐसा सम्मान पाकर दत्ता सर के चेहरे में मुस्कान ख़िल गई। अचानक उनकी नज़र सोनू पर पड़ी जो कुर्सी में ही बैठा था। क्रोध से वे तिलमिला उठे। गुस्से में वे उनके क़रीब गए। सोनू फिर भी नहीं उठा। "तेरी इतनी हिम्मत ,शिक्षक के सामने भी बैठा है। तू खड़ा नहीं हो सकता क्या ?" दत्ता सर ने कहा ।
      सोनू कुछ नहीं बोल पाया। वह कोई सफाई दे पाता उससे पहले ही दत्ता सर ने 'आव देखा न ताव' ,और पास में पड़ी छड़ी उठाई और  उनकी हथेलियों को पीटना शुरू कर दिए। पूरी कक्षा में डर के मारे सन्नाटा छा गया। तभी एक बच्चे ने घबराते हुए कहा ," सर जी सोनू खड़ा नहीं हो सकता।" दत्ता सर ने पूछा ," क्यों खड़े नहीं हो सकता ,क्या उसके पैर टूट गए हैं ?" सर वह बचपन से ही खड़ा नहीं हो सकता ,वह दोनों पैर से दिव्यांग है ।" उस बच्चे ने कहा।दत्ता सर ने सोनू की ओर देखा ,उनके आँखों से अश्रु की अविरल धारा बह रही थी। फिर उनके पैरों की ओर नज़र डाला। उसे देखकर उन्हें अपनी ग़लती का अहसास हुआ।पश्चाताप की अग्नि में वे जलने लगे ,उनका हृदय द्रवित हो उठा। वे ख़ुद को रोक नहीं पा रहे थे ।दत्ता सर की आँखों से भी आँसू बह निकले।वे सोनू को गले लगाकर फूट फूट कर रोने लगे।उनकी हथेलियों को चूमा और अपने हाथों से सोनू के आँसू पोछते हुए कहा ," बेटा मुझे माफ़ कर दो ,मुझसे बहुत बड़ी भूल हुई है आज ।"
  " नहीं सरजी ! इसमें आपकी कोई गलती नहीं है "सोनू ने बड़े प्यार से कहा। और दोनों फ़फ़क फ़फ़क कर रोने लगे।छुट्टी के बाद दत्ता सर सोनू के घर गए और उनके पालकों से मिलकर माफी माँगी। सोनू के पिताजी ने कहा ," गुरुजी आप लोग माली की तरह है ,आपकी देखरेख में ही हमारे बच्चे फूलों की तरह महकते हैं और अच्छे इंसान बनते हैं।आप लोग माता पिता से भी बढ़कर है। " यह बात सुनकर दत्ता सर को चैन मिला ,उस दिन से उनके भीतर अभूतपूर्व परिवर्तन आया। वे उस विद्यालय के सबसे प्रिय शिक्षक बन गए।
सीख :- हम शिक्षक बच्चों की वस्तु स्थिति ,उनकी समस्याओं और  सच्चाई को जाने बिना उन पर बरस पड़ते हैं।पर अच्छी बात यह कि अपनी ग़लती जानने के बाद प्रायश्चित करते हैं और अपनी भूल भी सुधारते हैं।

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