ऐसा हो अपना छत्तीसगढ़

युगों युगों तक रहे अमर
ऐसा हो अपना छत्तीसगढ़।
खेतों में लहलहाए फसलें
हर हाथ को काम मिले।
स्वच्छ जल से इठलाये नदियां
प्रगति के हो सपने उजले।
न हो कोई भूखा प्यासा
अपनी ताकत पे करे विश्वास।
सत्य निष्ठा श्रम श्रद्धा
रहे अटूट मन की आस।
भाईचारा प्रेम सद्भावना
उन्नत हो हर गांव शहर।
युगों युगों...............






टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

छत्तीसगढ़ी कविताएँ